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काँचरापाड़ा कारखाने की स्थापना वाष्प इंजिन एवं काठ के बने कैरेज और वैगन की मरम्मत के लिये संयुक्त कारखाने के रूप में पश्चिम बंगाल रेलवे द्वारा सन् 1863 में की गयी थी। काँचरापाड़ा कारखाना भारतीय रेल के परम्परागत कारखाना होने के साथ ही विद्युत कर्षण के रोलिंग स्टॉक के सभी स्तरों के उपकरणों में सिद्धहस्त है एवं ए.सी, कर्षण रोलिंग स्टॉक से सम्बंधित प्रमुख विकास कार्यों के लिये सामने प्रस्तुत है। इस समय लोको परिसर प्रमुखत: विद्युत इंजिन और विद्युत गुणित इकाई कोचों की मरम्मत और पी.ओ.एच. के कार्य में संलग्न है जबकि कैरिज परिसर विद्युत गुणित इकाई कोचों, ए.सी. ब्रॉड-गेज, नैरो-गेज पारंपरिक कोच, आर्ट वैन और आठ पहिये वाली टॉवर कार के मरम्मत और पी.ओ.एच. का कार्य करता है। |